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पूर्वाञ्चल लोक का खेल : डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

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    मानव जीवन में खेल का विशेष महत्व है । बचपन से लेकर यौवन तक और उसके बाद भी जीवन में किसी न किसी रूप में खेल की भूमिका तो रहती ही है । खेल हमारे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए एक नितांत आवश्यक और उपयोगी अवयव के रूप में मौजूद रहा है । आइए पहले हम खेलों के इतिहास के बारे में जानते हैं । जहां तक मेरा मानना है उससे यह कहा जा सकता है कि मानव के सामाजिक जीवन के आरंभ से ही खेल भी उसका अंग रहे होंगे। प्राप्त साक्ष्यों के आदर पर खेलों से सम्बद्ध कुछ ऐतिहासिक तथ्य मिलते है । प्राप्त कलाकृतियों और ढाँचों से पता चलता है कि चीन के लोग लगभग ४००० ईसा पूर्व से खेल की गतिविधियों में शामिल थे। ऐसा प्रतीत होता है कि चीन के प्राचीन काल में जिम्नास्टिक एक लोकप्रिय खेल था। तैराकी और मछली पकड़ना जैसे खेलों के साथ कई खेल पूरी तरह से विकसित और नियमबद्ध थे। इनका संकेत फराहों के स्मारकों से मिलता है। मिस्र के अन्य खेलों में भाला फेंक , ऊँची कूद और कुश्ती भी शामिल थी। फारस के प्राचीन खेलों में जौरखानेह ( Zourkhaneh) जैसा पारंपरिक ईरानी मार्शल आर्ट का युद्ध कौशल से गहरा संबंध था।   प्राचीन यूनानी...