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Legal Maxims

  Legal Maxims 1.Salus Populi Est Suprema Lex एक प्रसिद्ध लैटिन कहावत ( Latin maxim) है , जिसका हिंदी में अर्थ "जनता का कल्याण ही सर्वोपरि कानून है" या "लोगों की सुरक्षा और भलाई सबसे बड़ा कानून है" होता है। मुख्य बातें ( Key Details) अर्थ ( Meaning): इसका मतलब है कि समाज या जनता की भलाई और सुरक्षा किसी भी अन्य नियम या व्यक्तिगत हित से ऊपर होती है। * सिद्धांत ( Principle): कानून के क्षेत्र में यह इस बात पर जोर देता है कि जब व्यक्तिगत अधिकारों और सामाजिक हित के बीच टकराव हो , तो हमेशा समाज या जनता के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। * उत्पत्ति ( Origin): यह प्रसिद्ध रोमन दार्शनिक और वकील सिसरो ( Cicero) की पुस्तक 'De Legibus' से ली गई है। 2.Dies dominicus non est juridicus ek Latin legal maxim hai jiska arth hai " रविवार न्यायिक या कानूनी कार्यवाही का दिन नहीं है" ( Sunday is not a day in law / Sunday is not a juridical day). 3.Rex nunquam moritur" एक लातिन ( Latin) कानूनी सूत्र ( legal maxim) है , जिसका हिंदी में अर्थ होता है: ...

भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक भूमिका

  भारत एक अत्यंत प्राचीन और आध्यात्मिक चेतना से सम्पन्न राष्ट्र है, अनेकता में एकता हमारे देश का सार-तत्व अनादि काल से रहा है और आज भी है । इसी विशेषता के कारण हमारे यहाँ बहुआयामी संस्कृति और विविधता पूर्ण समाज-व्यवस्था देखने को मिलती रही है । बहुआयामी संस्कृति और विविधता-पूर्ण समाज व्यवस्था के कारण हमारे देश में भाषाई विविधता भी देखने को मिलती रही रही है। प्राचीन काल से लेकर अब तक देखा जाए तो हमारे देश में अनेकों भाषाएं और विविध भाषा परिवार का वैविध्यपूर्ण संयोजन देखने को मिलता है । हमारी सभ्यता और संस्कृति के संवहन में भारतीय भाषाओं का विशेष योगदान है। इसी कारण बहुभाषिकता हमारी पहचान रही है और हमारी बहु-संस्कृतिवादी दृष्टि को इससे बल मिलता है । भारत एक बहुभाषी और बहु-सांस्कृतिक देश है , जहाँ भाषाएँ केवल संचार का साधन नहीं , बल्कि सांस्कृतिक पहचान और परंपरा की वाहक हैं। भारतीय संविधान ने 22 भाषाओं को अनुसूचित भाषाओं के रूप में मान्यता दी थी , जबकि देश में सैकड़ों बोलियाँ प्रचलित हैं। यह भाषाई विविधता भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का आधार है। “एकता में विविधता” का आदर्श भारतीय भाष...

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 ब्लाग- पॉडकास्ट ब्लागः- आधुनिक समय में संचार क्रान्ति के साथ-साथ लेखन जगत के क्षेत्र में भी नित नयापन देखने को मिलता है। इसी नयेपन के साथ-साथ हम अपने विचारों को आसानी से लोगों तक पहुँचाने में समर्थ हो रहे हैं। ब्लाग लेखन भी इसी तरह एक वर्वचुअल प्लेटफार्म हैं, जिसके माध्यम से हम न केवल अपने विचारों को लोगों तक सम्प्रेषित कर सकने में सक्षम होगें वरन् उसके माध्यम से ख्याति अर्जित करते हुए अर्थाजन भी कर सकेंगें। ब्लाग लेखन संचार क्रान्ति का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो वर्तमान समय में सृजनात्मकता को एक नये रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ब्लागिंग अपने आरम्भिक समय में अंग्रेजी माध्यम में ही उपलब्ध थी, लेकिन एक भाषा के रूप में हिन्दी का विस्तार जीवन के सभी क्षेत्रों में होने के साथ ही हिन्दी भाषा का प्रयोग लगभग सभी संचार के माध्यमों मे आसानी से किया जा रहा है। हिन्दी भाषा तकनीकी रूप से इतनी सक्षम हो चुकी है कि यह कहीं भी बोली लिखी, पढ़ी एवं समझी जा सकती है।  यूनिकोड़, मंगल, गूगल इंडिक के आ जाने से कम्प्यूटर, लैपटाप, टैबलेट और मोबाइल में भी हिन्दी आसानी से लिखी जा रही है। इसी कारण अब हि...

पूर्वाञ्चल लोक का खेल : डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

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    मानव जीवन में खेल का विशेष महत्व है । बचपन से लेकर यौवन तक और उसके बाद भी जीवन में किसी न किसी रूप में खेल की भूमिका तो रहती ही है । खेल हमारे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए एक नितांत आवश्यक और उपयोगी अवयव के रूप में मौजूद रहा है । आइए पहले हम खेलों के इतिहास के बारे में जानते हैं । जहां तक मेरा मानना है उससे यह कहा जा सकता है कि मानव के सामाजिक जीवन के आरंभ से ही खेल भी उसका अंग रहे होंगे। प्राप्त साक्ष्यों के आदर पर खेलों से सम्बद्ध कुछ ऐतिहासिक तथ्य मिलते है । प्राप्त कलाकृतियों और ढाँचों से पता चलता है कि चीन के लोग लगभग ४००० ईसा पूर्व से खेल की गतिविधियों में शामिल थे। ऐसा प्रतीत होता है कि चीन के प्राचीन काल में जिम्नास्टिक एक लोकप्रिय खेल था। तैराकी और मछली पकड़ना जैसे खेलों के साथ कई खेल पूरी तरह से विकसित और नियमबद्ध थे। इनका संकेत फराहों के स्मारकों से मिलता है। मिस्र के अन्य खेलों में भाला फेंक , ऊँची कूद और कुश्ती भी शामिल थी। फारस के प्राचीन खेलों में जौरखानेह ( Zourkhaneh) जैसा पारंपरिक ईरानी मार्शल आर्ट का युद्ध कौशल से गहरा संबंध था।   प्राचीन यूनानी...

भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक भूमिका : डॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

भारत एक अत्यंत प्राचीन और आध्यात्मिक चेतना से सम्पन्न राष्ट्र है , अनेकता में एकता हमारे देश का सार-तत्व अनादि काल से रहा है और आज भी है । इसी विशेषता के कारण हमारे यहाँ बहुआयामी संस्कृति और विविधता पूर्ण समाज-व्यवस्था देखने को मिलती रही है । बहुआयामी संस्कृति और विविधता-पूर्ण समाज व्यवस्था के कारण हमारे देश में भाषाई विविधता भी देखने को मिलती रही रही है। प्राचीन काल से लेकर अब तक देखा जाए तो हमारे देश में अनेकों भाषाएं और विविध भाषा परिवार का वैविध्यपूर्ण संयोजन देखने को मिलता है । हमारी सभ्यता और संस्कृति के संवहन में भारतीय भाषाओं का विशेष योगदान है। इसी कारण बहु-भाषिकता हमारी पहचान रही है और हमारी बहु-संस्कृतिवादी दृष्टि को इससे बाल मिलता है । भारत एक बहुभाषी और बहु-सांस्कृतिक देश है , जहाँ भाषाएँ केवल संचार का साधन नहीं , बल्कि सांस्कृतिक पहचान और परंपरा की वाहक हैं। भारतीय संविधान ने 22 भाषाओं को अनुसूचित भाषाओं के रूप में मान्यता दी है , जबकि देश में सैकड़ों बोलियाँ प्रचलित हैं। यह भाषाई विविधता भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का आधार है। “एकता में विविधता” का आदर्श भारतीय भाषाओं ...

पूर्वाञ्चल के लोक संस्कारों और कृषि का पर्व : नेवान (नवान्न): डा. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव

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  वैदिक काल से लेकर आज तक भारतीय समाज में शास्त्र एवं लोक का सामंजस्य देखने को मिलता है । भारतीय जीवन पद्धति लोक कि धारा वह धारा है, जो अनादि काल से हमारे जीवन से सिंचित करती रही है । लोक जीवन कि विविधता और विस्तार ही वह स्रोत है, जिससे हमारे समाज में उल्लास का संचार होता रहा है । विविधता एवं विस्तार का आधार हमारी कृषि प्रधान संस्कृति रही है । धरती और प्रकृति का हमारी लोक परम्परा एवं संस्कृति में विशेष महत्व रहा है । हमारा लोक न सिर्फ विविधताधर्मी है वरन बेहतर जीवन जीने के लिए एक मजबूत आधार भी प्रदान करता है । लोक कि सरसता में कुछ वैज्ञानिक तत्वों का समावेश भी देखने को मिलता है । लोक कि सरसता एवं वैज्ञानिकता भारत के सभी क्षेत्रों के लोक में देखी जा सकती है । पूर्वी उत्तर प्रदेश कि लोक परम्परा अत्यंत समृद्ध एवं सुदृढ़ रही है । ‘पूर्वाञ्चल की पोटली’ में कला, संस्कृति , सभ्यता, गीत-संगीत, कथा और नाट्य की व्यापक एवं प्राचीन परम्परा के साथ-साथ खेती किसानी से जुड़ी परम्पराओं का भी समावेश देखने को मिलता है । समय के साथ ही हम अपनी जड़ों और परम्पराओं से दूर होते जा रहे हैं । जिस तरह से उत...