Heeraman Aur Heerabai
गाड़ीवान 'हीरामन' अपनी बैलगाड़ी में 'हीराबाई' को लेकर फारबिसगंज के मेले में छोड़ने जा रहा है ... तभी फिज़ा में गूंजते गीत को सुन हीराबाई कहती है ... यहां देखती हूँ, हर कोई गीत गाता रहता है ... गीत नहीं गायेगा तो करेगा क्या, कहते हैं ,,,, 'फटे कलेजा गाओ गीत, दुःख सहने का एहि रीत ...' तुम्हारे यहां की भाषा में गीत और भी मीठा लगता है। लगता है, बस सुनती ही रहूँ ... ये महुआ घटवारिन का गीत है, वो कजरी नदी का घाट था न ,,,, बस उसी का ... अच्छा, तुम्हें आता है ये गीत ,,,, सुनाव न मीता ... इस्स ,,,, गांव का गीत सुनने का बड़ा सौख है, आपको ... "... वो जो महुआ घटवारिन का घाट था न, उसी मुलुक की थी महुआ ,,,, थी तो घटवारिन, लेकिन सौ सतवंती में एक ,,,, उसका बाप दिन दिहाड़े ताड़ी पी के बेहोस पड़ा रहता था ,,,, उसकी सौतेली माँ थी साक्षात राक्षसनी ,,,, महुआ कुंवारी थी ,,,, भरी पूरी दुनिया में कोई न था उसका ..." दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, काहे को दुनिया बनायी, तुने काहे को दुनिया बनायी ... दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, काहे को दुनिया बनायी, तुने काहे को ...