Heeraman Aur Heerabai


 गाड़ीवान 'हीरामन' अपनी बैलगाड़ी में 'हीराबाई' को लेकर फारबिसगंज के मेले में छोड़ने जा रहा है ...

तभी फिज़ा में गूंजते गीत को सुन हीराबाई कहती है ...
यहां देखती हूँ, हर कोई गीत गाता रहता है ...
गीत नहीं गायेगा तो करेगा क्या, कहते हैं ,,,,
'फटे कलेजा गाओ गीत, दुःख सहने का एहि रीत ...'
तुम्हारे यहां की भाषा में गीत और भी मीठा लगता है। लगता है, बस सुनती ही रहूँ ...
ये महुआ घटवारिन का गीत है, वो कजरी नदी का घाट था न ,,,, बस उसी का ...
अच्छा, तुम्हें आता है ये गीत ,,,, सुनाव न मीता ...
इस्स ,,,, गांव का गीत सुनने का बड़ा सौख है, आपको ...
😊
"... वो जो महुआ घटवारिन का घाट था न, उसी मुलुक की थी महुआ ,,,,
थी तो घटवारिन, लेकिन सौ सतवंती में एक ,,,,
उसका बाप दिन दिहाड़े ताड़ी पी के बेहोस पड़ा रहता था ,,,,
उसकी सौतेली माँ थी साक्षात राक्षसनी ,,,,
महुआ कुंवारी थी ,,,, भरी पूरी दुनिया में कोई न था उसका ..."
दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई,
काहे को दुनिया बनायी, तुने काहे को दुनिया बनायी ...
दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई,
काहे को दुनिया बनायी, तुने काहे को दुनिया बनायी ...
"... कैसे कहूँ, महुआ के रूप का बखान ,,,,
हिरनी जैसी कजरारी आंखें, चांद सा चमकता चेहरा, एड़ी तक लंबे रेशमी बाल ,,,,
जब वो मुस्कुराती, तो जैसे बिजली कौंध जाती ,,,, भगवान जी ही ऐसा रूप भर सकते हैं, माटी के पुतले में ..."
काहे बनाये तूने माटी के पुतले,
धरती ये प्यारी प्यारी मुखड़े ये उजले ...
काहे बनाया तूने दुनिया का खेला,
काहे बनाया तूने ... दुनिया का खेला ...
जिसमें लगाया जवानी का मेला ...
गुप-चुप तमाशा देखे, वाह रे तेरी खुदाई,
काहे को दुनिया बनायी ... तुने काहे को दुनिया बनायी ...
दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई,
काहे को दुनिया बनायी, तुने काहे को दुनिया बनायी ...
"... जवान हो गई थी, महुआ ,,,,
फिर भी कहीं सादी ब्याह की बात नहीं चलाई किसी ने, सुबह साम वो अपनी मरी माँ को याद करके रोती ,,,,
रात दिन कलपता था, बेचारी का मन ...
मन ,,,, समझती हैं न आप ..."
तू भी तो तङपा होगा मन को बना कर,
तूफां ये प्यार का मन में छुपा कर ...
कोई छवि तो होगी आँखों में तेरी,
कोई छवि तो होगी ... आँखों में तेरी ...
आंसू भी छलके होंगे पलकों से तेरी ...
बोल क्या सूझी तुझको काहे को प्रीत जगाई,
काहे को दुनिया बनायी ... तुने काहे को दुनिया बनायी ...
दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई,
काहे को दुनिया बनायी, तुने काहे को दुनिया बनायी ...
"... एक दिन एक थका प्यासा मुसाफिर नदी किनारे पानी पीने आया।
महुआ को देखते ही उस पर रीझ गया। नादान महुआ भी उसे दिल दे बैठी ,,,,
जंगल की आग की तरह गांव में फैल गई, उनकी प्यार की बात ,,,,
सौतेली माँ भला कैसे देख सकती थी, उनका सुख ,,,,
उसने महुआ को एक सौदागर के हाथ बेच दिया। रोती छटपटाती महुआ चली गई, सौदागर के साथ ,,,
, बिछड़ गई जोड़ी ,,,, महुआ का प्रेमी आज भी जैसे रोता है ..."
प्रीत बनाके तूने जीना सिखाया,
हँसना सिखाया, रोना सिखाया ...
जीवन के पथ पर मीत मिलाये,
जीवन के पथ पर ... मीत मिलाये ...
मीत मिला के तूने सपने जगाए ...
सपने जगा के तूने काहे को दे दी जुदाई,
काहे को दुनिया बनायी ... तुने काहे को दुनिया बनायी ...
दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई,
काहे को दुनिया बनायी, तुने काहे को दुनिया बनायी ..
.
ये फ़िल्म सेल्युलाइड पर चित्रित प्रेम की वो लंबी कविता है जिसे रचा है, शैलेन्द्र जी ने। जुबां फणीश्वरनाथ रेणु जी की है शंकर-जयकिशन ने अपने साजों से संवारा है। मुकेश जी, लता जी, आशा जी, मन्ना दा और मुबारक बेगम आदि ने सुरों से सराबोर किया और लच्छू जी महाराज के भाव और भंगिमाओं से अभिभूत इस प्रेम-लोक को निर्देशित किया बासु भट्टाचार्य ने।........ गीत लिखे हैं शैलेन्द्र जी और हसरत जयपुरी जी ने तथा पटकथा नवेन्दु घोष जी का है। हीरामन हैं राजकपूर और हीराबाई को प्राणवान किया है वहीदा रहमान जी ने। इन सभी कलाकारों और फनकारों के अदाओं और फनों का इतिहास है .....
यह "तीसरी कसम"....

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